कल्याणी-धृतदारी गीत लिरिक्स (कहंवा से आवे) | Kalyani Dhritdari Vivah Geet
पढ़ें पारंपरिक कल्याणी-धृतदारी विवाह गीत “कहंवा से आवे” के लिरिक्स हिंदी और अंग्रेजी में। जानें तिलक और हल्दी रस्म में गाए जाने वाले इस देहाती लोकगीत का महत्व।
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यह रस्म तिलक के बाद होता है। इसके साथ ही हल्दी , देवपूजी, मटकोर जैसे रस्म होता है।
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कल्याणी-धृतदारी गीत (कहंवा से आवे) – लिरिक्स और महत्व
कल्याणी-धृतदारी गीत उत्तर भारत, विशेषकर बिहार और उत्तर प्रदेश की विवाह परंपराओं का एक अभिन्न हिस्सा है। हिंदू शादियों में रस्मों-रिवाजों के दौरान गाए जाने वाले देहाती लोकगीत न केवल माहौल को खुशनुमा बनाते हैं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर को भी जीवित रखते हैं।
यह विशेष कल्याणी-धृतदारी गीत “कहंवा से आवे हाड़ी भर दहीं” मुख्य रूप से तिलक रस्म के बाद गाया जाता है। इसके साथ ही विवाह की अन्य महत्वपूर्ण रस्में जैसे हल्दी, देवपूजी और मटकोर की शुरुआत होती है। आइए पढ़ते हैं इस खूबसूरत सगुन गीत के बोल।
कल्याणी-धृतदारी गीत | (कहंवा से आवे)
कहंवा से आवे हाड़ी भर दहीं, औरो पियर चुनरी हे। कहंवा से अइलन अ० भईया, हांथ में रुमाल लेले हे।।
कहंवा रखाइव हाड़ी भर दही, औरो पियर चुनरी हे। कहवा बैठाइव अ० भईया, हाथ में रुमाल लेले हे।।
घरवा रखाइव हाड़ी भर दही, औरो पियर चुनरी हे। दुरवा बैठाइव अ० भईया, हाथ में रुमाल ले हे।।
अन्नी दुअनी हाड़ी भर दही, औरो पियर चुनरी है। छोटकी ननदीया अ० भईया, हाथ में रूमाल लेले है।।
उड़ी पड़ी गइले हाड़ी भर दही, औरो पियर चुनरी हे। घूरीयों न ताकलन छोटकी ननदी, हाथ में रुमाल ले लेले हे।।
Kalyani Dhritdari Lyrics in English (Hinglish)
Kahanva se aave haadee bhar daheen, auro piyar chunaree he. Kahanva se ailan a0 bheeya, haanth mein rumaal lele he..
Kahanva rakhaiv haadee bhar dahee, auro piyar chunaree he. Kahava baithaiv a0 bheeya, haath mein rumaal lele he..
Gharava rakhaiv haadee bhar dahee, auro piyar chunaree he. Durava baithaiv a0 bheeya, haath mein rumaal le he..
Annee duanee haadee bhar dahee, auro piyar chunaree hai. Chhotakee nanadeeya a0 bheeya, haath mein roomaal lele hai..
Udee padee gaile haadee bhar dahee, auro piyar chunaree he. Ghooreeyon na taakalan chhotakee nanadee, haath mein rumaal le lele he..
इस लोकगीत का अर्थ और महत्व (Meaning & Significance)
शादी-विवाह में दही (Curd) और पीली चुनरी (Piyar Chunari) को अत्यंत शुभ (सगुन) माना जाता है। दही को शीतलता और शुभ कार्य की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है, जबकि पीली चुनरी हल्दी और वैवाहिक पवित्रता को दर्शाती है।
इस गीत में घर की महिलाएं गाते हुए पूछती हैं कि यह शगुन का दही और पीली चुनरी कहां से आई है और रुमाल लिए हुए भाई (या अतिथि) कहां से आए हैं। यह गीत हंसी-ठिठोली और परिवार के सदस्यों (जैसे ननद और भाई) के बीच के प्यार भरे रिश्ते को भी खूबसूरती से दर्शाता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. कल्याणी-धृतदारी गीत कब गाया जाता है? यह पारंपरिक गीत मुख्य रूप से शादी में तिलक की रस्म पूरी होने के बाद गाया जाता है। इसके अलावा इसे हल्दी, मटकोर और देवपूजी के समय भी गाया जा सकता है।
2. इस गीत में ‘हाड़ी भर दही’ और ‘पियर चुनरी’ का क्या मतलब है? हाड़ी भर दही और पीली चुनरी हिंदू शादियों में पवित्रता और शगुन का प्रतीक माने जाते हैं। शुभ कार्यों में दही को सौभाग्य का सूचक माना जाता है।
3. क्या यह गीत केवल बिहार में गाया जाता है? मुख्य रूप से यह गीत बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) की शादी की रस्मों में महिलाओं द्वारा पारंपरिक रूप से गाया जाता है।