कल्याणी-धृतदारी गीत (अंगना लिपाय) – लिरिक्स और अर्थ | Kalyani Dhritdari Geet
पढ़ें पारंपरिक भोजपुरी कल्याणी-धृतदारी विवाह गीत “अंगना लिपाय” के लिरिक्स हिंदी और अंग्रेजी में। जानें इस तिलक गीत का अर्थ और वैवाहिक महत्व।
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कल्याणी, धृतदारी गीत (अंगना लिपाय) – लिरिक्स और अर्थ
कल्याणी-धृतदारी गीत उत्तर भारत, विशेषकर बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के पारंपरिक विवाह का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है। शादी की रस्मों में गाए जाने वाले ये लोकगीत विवाह के माहौल को भक्ति और भावनाओं से भर देते हैं।
यह विशेष कल्याणी गीत “गाई के गोवर अंगना लिपाय” मुख्य रूप से तिलक की रस्म के बाद और विवाह की अन्य शुभ रस्मों के दौरान महिलाओं द्वारा गाया जाता है। इस गीत में विवाह के मंडप की तुलना भगवान राम और माता सीता के विवाह से की गई है। आइए पढ़ते हैं इस पारंपरिक गीत के लिरिक्स और इसका अर्थ।
कल्याणी, धृतदारी गीत लिखा हुआ | (गाई के गोवर)
गाई के गोवर अंगना लिपाय, गजमोती अहोराम चऊंका पूराय। राम जी के आसन ऋषि के दुआर।।
चउकावा बैठल राम कतरल पान, जनघिया बैठल सीता नयना दारयालोर। राम जी के आसन ऋषि के दुआर।।
किया याद परलो सीता माई से बाप, किया याद परलो सीता सहोदर जेठ भाई। राम जी के आसन ऋषि के दुआर।।
नही मन परलो राम जी माई से बाप, नहीं मन परलो राम जी सहोदर जेठ भाई। राम जी के – – – – – 2
नईहर के दुःख सुख कहलो न जाय, निर्धन माइ बाप तेजलो न जाय। राम जी – – – – – – – – 2
Kalyani, Dhritdari Lyrics in English (Hinglish)
Gaee ke govar angana lipaay,
Gajamotee ahoraam choonka pooraay.
Raam jee ke aasan rshi ke duaar..
Chukaava baithal raam kataral paan,
Janaghiya baithal seeta nayana daarayaalor.
Raam jee ke aasan rshi ke duaar..
Kiya yaad paralo seeta maee se baap,
Kiya yaad paralo seeta sahodar jeth bhaee.
Raam jee ke aasan rshi ke duaar..
Nahee man paralo raam jee maee se baap,
Nahin man paralo raam jee sahodar jeth bhaee.
Raam jee ke – – – – – 2
Naeehar ke duhkh sukh kahalo na jaay,
Nirdhan mai baap tejalo na jaay.
Raam jee – – – – – – – – 2
इस लोकगीत का अर्थ और महत्व (Meaning of the Song)
यह गीत वैवाहिक वेदी (मंडप) की पवित्रता और एक कन्या की विदाई की भावनाओं का बहुत ही सुंदर वर्णन है:
- पवित्रता का प्रतीक: गीत की शुरुआत में कहा गया है कि गाय के गोबर से आंगन को लीपा गया है और गजमोती (मोतियों) से चौक पूर कर (रंगोली बनाकर) भगवान राम के लिए आसन लगाया गया है। हिंदू धर्म में गाय का गोबर अत्यंत पवित्र माना जाता है।
- सीता जी की भावनाएं: गीत में वर्णन है कि राम जी आसन पर बैठे हैं और माता सीता उनके पास बैठी हैं, लेकिन उनकी आंखों में आंसू हैं। जब उनसे पूछा जाता है कि क्या उन्हें अपने माता-पिता या बड़े भाई की याद आ रही है, तो वह अपने मायके (नईहर) के सुख-दुख और अपने माता-पिता के प्रति प्रेम को व्यक्त करती हैं।
- विवाह का मार्मिक दृश्य: यह गीत हर उस बेटी की कहानी है जो विवाह के समय अपने मायके को छोड़ते हुए भावुक हो जाती है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. “अंगना लिपाय” कल्याणी गीत विवाह की किस रस्म में गाया जाता है?
यह कल्याणी-धृतदारी गीत मुख्य रूप से तिलक की रस्म के बाद और विवाह की वेदी (मंडप) तैयार करते समय महिलाओं द्वारा गाया जाता है।
2. इस गीत में ‘गजमोती चऊंका पूराय’ का क्या अर्थ है?
विवाह या किसी भी शुभ कार्य से पहले आंगन में चौक (रंगोली) पूरने की परंपरा है। इस गीत में कल्पना की गई है कि भगवान राम के विवाह के लिए मोतियों (गजमोती) से चौक बनाया गया है, जो रस्म की भव्यता को दर्शाता है।
3. क्या कल्याणी और धृतदारी गीत एक ही होते हैं?
हाँ, कल्याणी और धृतदारी गीत पारंपरिक विवाह के मंगल गीत हैं जो देवी-देवताओं का आह्वान करने और विवाह के शुभ कार्यों की शुरुआत के समय गाए जाते हैं।
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